Wednesday, October 19, 2011

ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।

ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।

  चाहे फिर तू चट्टानों से टकराये।


समन्दर में लहरें आयें या मौसम परिवर्तित हो जाये।


ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।


चाहे कितनी अधेरी रात हो या फिर दरिया में तूफान हो।


न डरना ,न डगमगाना,न होना निराश तुम।


रखना मजबूत इरादे तुम।


ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।


घना रेगिस्तान हो या बंजर भूमि का मैदान हो।


घनी गहरी धूप हो या बिन बादल बरसात हो।


ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये। 

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