ये यादों का मौसम है जो आता है जाता है,
पलकों पर ख़वाब बनतें हैं सवरतें हैं,
आशाओं के बादल मन में घुमढतें हैं,
तुम कौन हो ?कहाँ से आये हो?
मन यह सवाल करता है,
हकीकत में क्या तुम कुछ पैगाम लेकर आये हो?
या यूँ ह़ी हमें परेशां करने आये हो,
ऐसा लगता है परियों के देश आये हैं
महसूस करके देखा साथी कोई पुराना साथ है..
भीड़ अनजानी है पर पास यादों की लड़ी है..
एक पल के लिए लगा सपना तो नहीं ...
दूसरे पल ये जाना की यह हकीकत है....
हकीकत तो है पर बस पल भर के लिए ..
याद है पुरानी दास्ताँ ,जब हम सब थे साथ साथ ..
वादा किया था हमने अपने- आप से
लौटे कर आयेगें हम ,आप से कुछ बातें कहने ...
कुछ पल ,कुछ यादें समेट कर हम चल दिए थे ...
जिंदगी के नए सफ़र पर ...भविष्य -निर्माण पर ...
वादा किया था मिलेंगे आने वाले पल में ..
कल वह वादा याद आया ,जब हमने देखा था पीछे मुड़ कर ,
यह कहकर ,"जाने वाले को अगर मुड़कर देखो तो ज़िन्दगी में दुबारा मुलाकात जरुर होती है "