Wednesday, August 15, 2012
Sunday, July 22, 2012
यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
तुम्हारा साथ मुझे हर बन्धन से भी प्यारा है।
कहते-कहते बात लबों पर आकर रूक जाती है,
पर तुम्हारे सामने आते ही ये आखें तुमसे बहुत कुछ कह जाती है।
यह सच है कि मैं तुमसे और तुम्हारी जिन्दगी से जुडीं हूं।
जज्बात तो हैं पर तुमसे बयां करना नहीं आता,
तुम गैर नहीं पर फिर भी तुमसे कहना नहीं आता,
हां तुम जिन्दगी की हकीकत हो,
पर ये भी तुमसे कहना नहीं आता।
एक सपना जो मैनें देखा मेरे और तुम्हारे लिए,
उस सपने की महक मेरी जिन्दगी में है,
ख्वाब ओर ह्कीकत का अंतर तो पता नहीं,
हां ,ये सच है कि यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
तुमसे कुछ ना कह्ने का कारण बस इतना ही है,
तुमसे दूर जाने से डर लगता है,
तुम्हारे इंकार से डर लगता है,
तुम्हारी बेरूखी से डर लगता है,
हां ,ये सच है कि यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
देखो!यह है मेरा बचपन ।
देखो!यह है मेरा बचपन ।
कितना निश्चल ,कितना प्यारा।
देखो! यह है मेरा बचपन ।
कभी आकाश में उडते हवाई जहाज को देखकर,
साथ पंछी बनकर उडता -बचपन।
देखो! यह है मेरा बचपन।
कभी पानी वाली मछ्ली को देखकर ,
उसकी छटपटाहट को महसूस करता-बचपन
देखो! यह है मेरा बचपन।
कभी कागज की कश्ती बनाकर,पानी में तैरता सा-बचपन।
देखो! यह है मेरा बचपन।
कभी दोस्तों के साथ रंग-बिरंगे सपने -सा बुनता-बचपन।
देखो! यह है मेरा बचपन।
कभी पतंग लेकर ढील देता सा-बचपन।
देखो! यह है मेरा बचपन।
कभी क्लास में टीचर का डंडा खाकर मुस्कुराता सा-बचपन।
Saturday, July 21, 2012
यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
तुम्हारा साथ मुझे हर बन्धन से भी प्यारा है।
कहते-कहते बात लबों पर आकर रूक जाती है,
पर तुम्हारे सामने आते ही ये आखें तुमसे बहुत कुछ कह जाती है।
Saturday, March 3, 2012
परिदें
थे परिदें कुछ जो घर से निकले ,मंजिल की तलाश में।
देखे थे सपने सोती -जागती आखों से।
कभी खुशी से मुस्कुराते थे,कभी अपनों को याद करके रो भी जाते थे।
मुश्किलों से न घबराकर हौसलां बुलन्द रखतें थे।
देखे थे सपने सोती -जागती आखों से।
कभी खुशी से मुस्कुराते थे,कभी अपनों को याद करके रो भी जाते थे।
मुश्किलों से न घबराकर हौसलां बुलन्द रखतें थे।
Thursday, January 5, 2012
जीवन का कारवां य़ू ही चलता रहेगा ।
जीवन का कारवां य़ू ही चलता रहेगा ।
कभी गम के बादल गरजेगें.....
तो कभी खुशी की हवा चलेगी..
पर एक गुजारिश है तुमसे ऐ जिन्दगी!
जब दु;ख ज्यादा हों तो निराश मत होना,
अच्छे पलों को याद करके थोडा मुस्करा लेना।
कभी गम के बादल गरजेगें.....
तो कभी खुशी की हवा चलेगी..
पर एक गुजारिश है तुमसे ऐ जिन्दगी!
जब दु;ख ज्यादा हों तो निराश मत होना,
अच्छे पलों को याद करके थोडा मुस्करा लेना।
Wednesday, October 19, 2011
ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।
ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।
चाहे फिर तू चट्टानों से टकराये।
समन्दर में लहरें आयें या मौसम परिवर्तित हो जाये।
ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।
चाहे कितनी अधेरी रात हो या फिर दरिया में तूफान हो।
न डरना ,न डगमगाना,न होना निराश तुम।
रखना मजबूत इरादे तुम।
ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।
घना रेगिस्तान हो या बंजर भूमि का मैदान हो।
घनी गहरी धूप हो या बिन बादल बरसात हो।
ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।
चाहे फिर तू चट्टानों से टकराये।
समन्दर में लहरें आयें या मौसम परिवर्तित हो जाये।
ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।
चाहे कितनी अधेरी रात हो या फिर दरिया में तूफान हो।
न डरना ,न डगमगाना,न होना निराश तुम।
रखना मजबूत इरादे तुम।
ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।
घना रेगिस्तान हो या बंजर भूमि का मैदान हो।
घनी गहरी धूप हो या बिन बादल बरसात हो।
ओ राही! लक्ष्य न ओझल होने पाये।
Monday, September 12, 2011
क्या कहू,
क्या कहू,
किससे कहू ,
कैसे बयान करू ,
यह सच है,
तुमसे दूर जाकर हि समझ आया,
तुम्हारे पास रहने का मतलब ,
यह सच है ,कि तुम बहुत दूर चाले गये हो,
जैसे चांद आसमान में ,जैसे तारे आसमान में ,
फिर दिल ने यही कहा ,
कुछ ख्वाब थे जो अधूरे रह गए ..
कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं ..
कुछ यादें थी जो झिलमिल -सी हो गयी ..
Wednesday, August 31, 2011
यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
यह सच है कि मैं तुमसे और तुम्हारी जिन्दगी से जुडीं हूं।
जज्बात तो हैं पर तुमसे बयां करना नहीं आता,
तुम गैर नहीं पर फिर भी तुमसे कहना नहीं आता,
हां तुम जिन्दगी की हकीकत हो,
पर ये भी तुमसे कहना नहीं आता।
एक सपना जो मैनें देखा मेरे और तुम्हारे लिए,
उस सपने की महक मेरी जिन्दगी में है,
ख्वाब ओर ह्कीकत का अंतर तो पता नहीं,
हां ,ये सच है कि यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
तुमसे कुछ ना कह्ने का कारण बस इतना ही है,
तुमसे दूर जाने से डर लगता है,
तुम्हारे इंकार से डर लगता है,
तुम्हारी बेरूखी से डर लगता है,
हां ,ये सच है कि यह सपना मुझे हकीकत से भी प्यारा है,
Saturday, August 27, 2011
यह कैसे खवाब तुम इन पलकों पे देकर चले गए|
यह कैसे खवाब तुम इन पलकों पे देकर चले गए|
कितने अजीब ज़िन्दगी के ये रास्ते हैं
कितनी खामोश ये राहें हैं
यूँ चुपचाप हम चल तो दिए
पर तुम तक पहुचनेमें कितनी रातें अभी बाकी है..
Sunday, June 12, 2011
Tuesday, April 12, 2011
Akanksha Shukla: कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं
Akanksha Shukla: कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं: " कुछ ख्वाब थे जो अधूरे रह गए .. कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं .. ..."
Saturday, March 26, 2011
कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं
कुछ ख्वाब थे जो अधूरे रह गए ..
कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं ..
कुछ यादें थी जो झिलमिल -सी हो गयी ..
जिंदगी फिर से नए मोड़ पर ले आयी..
भूलना चाहती थी पर भूल नहीं पायी..
कुछ ज़िन्दगी के फसाने थे जो अफसाने बन कर रह गये..
किस्से तो बहुत से थे तुम्हे सुनाने को ..
दुआ तो की थी तुमसे मिलने की हमने ..
कुछ जज्बात थे जो कागज़ के पन्नों पर कहानी बनकर रह गये ..
कुछ उम्मीदें थी जो सिर्फ ख्याल बन कर रह गये
कुछ ख्वाब थे जो अधूरे रह गए
कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं ..
कुछ यादें थी जो झिलमिल -सी हो गयी..
कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं ..
कुछ यादें थी जो झिलमिल -सी हो गयी ..
जिंदगी फिर से नए मोड़ पर ले आयी..
भूलना चाहती थी पर भूल नहीं पायी..
कुछ ज़िन्दगी के फसाने थे जो अफसाने बन कर रह गये..
किस्से तो बहुत से थे तुम्हे सुनाने को ..
दुआ तो की थी तुमसे मिलने की हमने ..
पर ज़िन्दगी ने एक झलक भी तुम्हारी न दिखलायी
कुछ आँसूं थे जो आँखों से पानी बनकर बह गये कुछ जज्बात थे जो कागज़ के पन्नों पर कहानी बनकर रह गये ..
कुछ उम्मीदें थी जो सिर्फ ख्याल बन कर रह गये
कुछ ख्वाब थे जो अधूरे रह गए
कुछ बातें थी जो अनकही रह गयीं ..
कुछ यादें थी जो झिलमिल -सी हो गयी..
एक इम्तिहान
क्या लेकर आये हैं, क्या लेकर जायेगें
बस अपने कदमों के निशान छोड़ जायेगें
मंजिल करीब हैं और रास्ता है मुश्किल..
काटों से दामन बचाकर निकल जायेगें ..
ऐसा लगता है परियों के देश आये हैं
ऐसा लगता है परियों के देश आये हैं
महसूस करके देखा साथी कोई पुराना साथ है..
भीड़ अनजानी है पर पास यादों की लड़ी है..
एक पल के लिए लगा सपना तो नहीं ...
दूसरे पल ये जाना की यह हकीकत है....
हकीकत तो है पर बस पल भर के लिए ..
याद है पुरानी दास्ताँ ,जब हम सब थे साथ साथ ..
वादा किया था हमने अपने- आप से
लौटे कर आयेगें हम ,आप से कुछ बातें कहने ...
कुछ पल ,कुछ यादें समेट कर हम चल दिए थे ...
जिंदगी के नए सफ़र पर ...भविष्य -निर्माण पर ...
वादा किया था मिलेंगे आने वाले पल में ..
कल वह वादा याद आया ,जब हमने देखा था पीछे मुड़ कर ,
यह कहकर ,"जाने वाले को अगर मुड़कर देखो तो ज़िन्दगी में दुबारा मुलाकात जरुर होती है "
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